
कमरे के बाहर का गलियारा बेहद ठंडा और सुनसान था। लिली के कमरे के बंद दरवाज़े से पीठ सटाए लियो वहीं फर्श पर ढह जाने को था, लेकिन उसके भीतर का गनमैन, उसका आत्मसम्मान उसे घुटने टेकने से रोक रहा था। उसकी आँखों के सामने अभी भी लिली का वह शांत, बेफ़िक्र चेहरा घूम रहा था।
वह स्केचबुक, वह रेशमी गद्दा... क्या डांटे ने सचमुच उसकी मासूमियत को अपनी ज़हरीली अमीरी और हिफ़ाज़त के झूठे जाल में इस कदर उलझा दिया था कि वह अपने भाई के बदन पर लगे ज़ख़्मों को भी नहीं देख पा रही थी?
लियो ने लड़खड़ाते हुए अपने हाथ को अपनी छाती पर रखा। सूती शर्ट के मोटे कपड़े के नीचे, नीरो की दी हुई वो ज़हरीली और सुलगती हुई जलन अब एक गाढ़े, असहनीय दर्द में तब्दील हो चुकी थी। हवा का हर एक झोंका जब उसकी शर्ट को छूता, तो सीने की सूजी हुई त्वचा पर जैसे कोई जलता हुआ कोयला रख देता था।
"आज़ादी..." लियो के सूखे होठों से एक बेहद धीमी, खोई हुई फुसफुसाहट निकली। "क्या इस विला में इस लफ़्ज़ का कोई वजूद भी है?"
वह बहुत धीरे-धीरे, दीवार का सहारा लेते हुए सीढ़ियों की तरफ बढ़ने लगा। हर एक कदम उसके सब्र और उसकी शारीरिक बर्दाश्त की परीक्षा ले रहा था।
मुख्य हॉल में अब डांटे मौजूद नहीं था। केवल फायरप्लेस में जल रही लकड़ियों की चटखने की आवाज़ें आ रही थीं, जो उस बड़े से सुनसान हॉल में किसी के रोने की तरह महसूस हो रही थीं। लियो जानता था कि वह इस हालत में विला से बाहर कदम भी नहीं रख सकता।
बाहर कारुसो साम्राज्य के दर्जनों हथियारबंद गार्ड्स तैनात थे, जिनकी वफ़ादारी सिर्फ डांटे और नीरो के लिए थी। और सबसे बड़ी बात, वह लिली को इस सोने के पिंजरे में अकेला छोड़कर जाने की सोच भी नहीं सकता था।
वह वापस नीचे, उसी बेसमेंट की तरफ जाने वाले गुप्त दरवाज़े की ओर मुड़ गया। विडंबना देखिए, जिस काली कोठरी से वह नफ़रत करता था, जहाँ नीरो ने उसकी रूह तक को तार-तार कर दिया था, इस वक्त वही अंधेरा कमरा उसकी लाचारी का इकलौता ठिकाना था।
जैसे ही वह बेसमेंट की सीढ़ियाँ उतरा, ठंडी और उमस भरी हवा ने उसका स्वागत किया। कमरे के भीतर बिखरे हुए काँच के टुकड़े और दर्द निवारक दवा की महक अभी भी हवा में घुली हुई थी। लियो ने भारी कदमों से चलकर बेड का कोना पकड़ा और बड़ी मुश्किल से खुद को उस पर ढहा दिया।
"उह्ह..."
शर्ट के कपड़े का घर्षण होते ही उसके मुँह से एक कराह निकल गई। उसने काँपते हाथों से अपनी शर्ट के ऊपर के तीन बटन खोले। जब उसने नीचे झाँका, तो उसकी आँखें खौफ और लाचारी से फैल गईं।
नीरो के दाँतों और होठों के गहरे निशान अब पूरी तरह नीले और बैंगनी पड़ चुके थे, और उनके आस-पास की त्वचा बुरी तरह सूज गई थी। बाईं बाँह का ज़ख़्म, जो रूसी सिंडिकेट के हमले में मिला था, वह भी इस तनाव के कारण दोबारा अंदर ही अंदर सुलगने लगा था।
लियो ने अपनी आँखें बंद कर लीं। वह खुद को इस कमज़ोर हालत में नहीं देखना चाहता था। वह एक खूंखार शूटर था, जिसने कभी मौत की आँखों में आँखें डाली थीं। लेकिन आज, वह कारुसो भाइयों की पज़ेसिवनेस की आग में एक सूखे पत्ते की तरह जल रहा था।
समय जैसे थम सा गया था। बेसमेंट की पीली मद्धम लाइटें लियो के आधे चेहरे पर साया बना रही थीं। वह अपनी ही भारी और असहज सांसों को गिन रहा था, जब अचानक उसे सीढ़ियों पर किसी के जूतों की धीमी, सधी हुई आहट सुनाई दी।
टैप... टैप... टैप...
यह आहट डांटे की भारी और रौबीली चाल जैसी नहीं थी। यह बिल्ली जैसी, शातिर और धीमी आहट थी—एक ऐसा शिकारी जो अपने शिकार को दोबारा तड़पता हुआ देखने के लिए लौट रहा था। नीरो।
लियो का पूरा बदन एक झटके में अकड़ गया। उसकी सांसें हलक में अटक गईं। उसने तुरंत अपनी शर्ट के बटनों को बंद करने की कोशिश की, लेकिन घबराहट और काँपते हाथों के कारण वह एक भी बटन नहीं लगा पाया।
दरवाज़ा बहुत धीरे से खुला, बिना किसी आवाज़ के।
नीरो कारुसो चौखट पर खड़ा था। उसका ब्लैक कोट अब गायब था। वह केवल अपनी सफेद शर्ट और ब्लैक ट्राउज़र्स में था, जिसकी आस्तीनें उसकी कोहनियों तक मुड़ी हुई थीं, जिससे उसकी मर्दाना और नसों से भरी बाहें साफ़ दिख रही थीं। उसके चेहरे पर वही चिर-परिचित, अनहिंज्ड और जुनूनी मुस्कान थी।
उसकी गहरी आँखें सीधे लियो के खुले हुए सीने पर टिक गईं, जहाँ उसके दिए हुए ज़ख़्म अब और ज़्यादा गहरे और सुलगते हुए दिख रहे थे।
"तो... मेरे वाइल्ड स्टैलियन ने अभी तक आराम नहीं किया?" नीरो की आवाज़ बेहद धीमी, गहरी और रफ़ थी, जो बेसमेंट की दीवारों से टकराकर लियो के कानों में पिघले हुए सीसे की तरह उतरी।
वह धीरे-धीरे बेड की तरफ बढ़ा। उसका हर एक कदम लियो के दिल की धड़कन को बढ़ा रहा था। लियो ने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन बेड की बैकरेस्ट दीवार से सटी हुई थी। उसके पास भागने का कोई रास्ता नहीं था।
"दूर रहो... नीरो..." लियो ने अपनी आवाज़ को जितना हो सके सख्त रखने की कोशिश की, लेकिन उसकी थरथराहट उसकी कमज़ोरी को साफ़ बयां कर रही थी। "डांटे ने कह दिया है... मैं बेगुनाह हूँ। तुम... तुम मुझे इस तरह यहाँ अपनी हवस के लिए कैद नहीं रख सकते।"
नीरो बेड के बिल्कुल करीब आकर रुक गया। उसने लियो की इस नफ़रत भरी आवाज़ का बुरा नहीं माना; बल्कि, उसकी आँखों में वह साइको संतुष्टि और गहरी हो गई। वह धीरे से बेड पर झुका, अपने दोनों हाथ लियो के दोनों तरफ टिका दिए, जिससे लियो पूरी तरह उसके जिस्म के साए में आ गया।
नीरो के बदन से आने वाली महँगी सिगार और कोलोन की मिली-जुली कड़क महक ने लियो के होश उड़ा दिए।
"बेगुनाही?" नीरो ने बहुत धीरे से फुसफुसाया, उसका चेहरा लियो के चेहरे से महज़ कुछ इंच की दूरी पर था। उसकी गर्म सांसें लियो के होठों को छू रही थीं। "माई डियर लियो... डांटे के लिए तुम बेगुनाह हो सकते हो, लेकिन मेरे लिए? तुम हमेशा गुनहगार रहोगे। और तुम्हारी सज़ा... सिर्फ मैं तय करूँगा।"
नीरो ने बहुत धीरे से, लगभग एक डॉक्टर की तरह नाजुकता से, अपना बड़ा और गर्म हाथ लियो के सीने के उस हिस्से पर रखा जहाँ सूजन सबसे ज़्यादा थी।
"आह!" लियो के मुँह से एक तीखी चीख निकलते-निकलते रह गई। उसने अपने दाँत अपने ही निचले होंठ में गड़ा लिए, जिससे वहाँ से खून की एक महीन लकीर निकल आई।
"देखो, यह बदन कितनी शिद्दत से चिल्ला रहा है," नीरो ने अपने अंगूठे से उस बैंगनी निशान को बहुत धीरे से सहलाया, जिससे लियो का पूरा बदन दर्द और एक अजीब, अनचाही सिहरन से काँप उठा।
"तुम्हारी नफ़रत मुझे मदहोश करती है, लियो। जितनी तुम मुझसे दूर भागने की कोशिश करते हो, मेरा यह पागलपन तुम्हें उतना ही बेरहमी से कुचलने के लिए मचल उठता है।"
नीरो की आँखें अब लियो के उन होठों पर टिक गईं जो दर्द से काँप रहे थे और जिन पर खून की वो लाल बूंद चमक रही थी। नीरो की आँखों का रंग गहरा हो गया—वह जंगलीपन, वह पज़ेसिव हवस दोबारा उसके वजूद पर हावी होने लगी थी।
"आज की रात बहुत लंबी होने वाली है, लियो..." नीरो ने अपनी रफ़ आवाज़ में कहा और उसका हाथ धीरे से नीचे की ओर खिसकते हुए लियो की कमर को अपनी मजबूत उंगलियों में भींचने लगा। "और तुम्हारी यह बेबस तड़प... इस शाम को और भी हसीन बनाएगी।"
लियो ने आँखें बंद कर लीं, क्योंकि वह जानता था कि इस सोने के पिंजरे और इस काले बेसमेंट के बीच, उसकी रूह को हर रोज़ इसी तरह सुलगना था।
[कहानी जारी रहेगी...]

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