
सुबह की ठंडी, मटमैली रोशनी जब बेसमेंट की छोटी खिड़की की लोहे की सलाखों से छनकर अंदर आई, तो कमरे की धुंध थोड़ी छँट चुकी थी। रात के उस बेकाबू, वाइल्ड और पैशनेट सैलाब के बाद कमरा किसी तबाह हुए जंग के मैदान जैसा लग रहा था। हवा में अभी भी नीरो के महँगे सिगार, वाइन और उन दोनों के जिस्मों की गर्म, ज़हरीली गंध घुली हुई थी।
लियो बेड पर उसी तरह बेज़ान सा पड़ा हुआ था। उसकी फटी हुई शर्ट के दोनों हिस्से पूरी तरह अलग हो चुके थे, जिससे उसकी चौड़ी छाती पूरी तरह खुली हुई थी। चाँद की रोशनी की जगह अब सुबह के उजाले ने उन निशानों को साफ़ कर दिया था जो नीरो रात भर उस पर छोड़ता रहा था। उसके दोनों सीनों पर नीरो के दाँतों और रफ़ सकिंग के गहरे लाल-बैंगनी निशान उभर आए थे, जो सूज चुके थे।


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