
शाम ढल चुकी थी। विला के बेसमेंट में कोहरे और सिगार की गंध का एक भारी कोहरा सा जम गया था। नीरो के जाने के बाद भी कमरे की हवा में उसकी मौजूदगी की वो डार्क, पज़ेसिव महक वैसे ही बरकरार थी।
लियो फर्श पर घुटनों के बल बैठा रहा, उसका सिर बंद दरवाज़े से टिका था। उसके होंठ अभी भी नीरो के उस गहरे, धीमे चुंबन की तपिश से सुलग रहे थे, और ज़ख़्मी बाँह की टीस अब पूरी रीढ़ में एक ठंडी लहर बनकर दौड़ रही थी।

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