
विला की दूसरी मंज़िल के गलियारे में बिछा आलीशान कारपेट लियो के भारी और थके हुए कदमों की आवाज़ को सोख रहा था। दोपहर की धूप अब कोहरे को चीरकर काँच की बड़ी खिड़कियों से अंदर आ रही थी, जिससे धूल के कण हवा में तैरते हुए साफ़ दिखाई दे रहे थे। लिली और डांटे को उस कमरे में एक साथ देखने के बाद, लियो के सीने में जो घबराहट और बेबसी उठी थी, उसने उसकी बाईं बाँह के दर्द को सौ गुना बढ़ा दिया था।
उसका जिस्म कमज़ोरी से काँप रहा था। वह धीरे-धीरे सीढ़ियों से नीचे उतरा और वापस बेसमेंट की उस खामोश अंधेरी दुनिया की तरफ बढ़ने लगा। विला का यह ऊपरी हिस्सा जहाँ रोशनी और सोने के पिंजरों से सजा था, वहीं नीचे का यह हिस्सा उसकी घुटन और नीरो के उस काले ऑबसेशन (जुनून) का गवाह था।

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