
शिकागो की सुबह हमेशा की तरह घने कोहरे और ठंडी हवाओं के साथ शुरू हुई। विला की विशाल काँच की खिड़कियों पर ओस की बूंदें जम चुकी थीं। बेसमेंट के उस डार्क कमरे में वेंटिलेटर से आती ठंडी हवा ने कमरे के तापमान को गिरा दिया था।
सुबह के ठीक छह बजे लियो की आँखें खुलीं। बुख़ार का असर दवाओं की वजह से थोड़ा कम ज़रूर हुआ था, लेकिन उसकी बाईं बाँह का दर्द अब एक भारी, सुलगती हुई टीस में बदल चुका था। उसने करवट लेने की कोशिश की, तो पूरी पीठ में एक अकड़न महसूस हुई। कल रात नीरो ने जिस तरह उसके माठे पर ठंडे पानी की पट्टियाँ रखी थीं और फिर उसकी गर्दन के ज़ख़्म को छुआ था, वह सब याद आते ही लियो का पूरा बदन नफ़रत से सिहर उठा।

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